महाराणा प्रताप का राजतिलक: मेवाड़ की गद्दी पर अधिकार की अनसुनी गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक कहानी

यह कहानी उस समय की है जब मेवाड़ के राजा महाराणा उदयसिंह का देहांत हो गया था। वे चित्तौड़ के राजा थे और उनकी मौत के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि अब राजा कौन बनेगा? उदयसिंह जी ने हमेशा की उत्तराधिकारी विधि को टालकर, पुरानी शुद्ध सनातन प्रथा को भूलकर अपनी छोटी प्यारी रानी के पुत्र जगमल को उत्तराधिकारी बना गये। उस समय की परंपरा के अनुसार सबसे बड़े बेटे को राजा बनाया जाता था। लेकिन महाराणा उदयसिंह ने यह परंपरा तोड़ दी और छोटे बेटे जगमल को गद्दी पर बैठा दिया। हालांकि उनके सबसे बड़े बेटे का नाम प्रताप सिंह था।

महाराणा प्रताप का राजतिलक उस समय एक ज्वलंत मुद्दा बन गया था। जगमल को राजा बनाने का यह फैसला कई राजपूत सरदारों को पसंद नहीं आया, खासकर उन लोगों को जो मानते थे कि मेवाड़ का राजा सिर्फ प्रताप को होना चाहिए। झालार के एक बड़े सरदार शोणिगुरु को भी यह बात बहुत गलत लगी। उन्होंने मेवाड़ के प्रधानमंत्री चूड़ावत कृष्णसिंह से पूछा कि वह कैसे इस फैसले को मान सकते हैं। कृष्णसिंह ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह एक बीमार राजा की आखिरी इच्छा थी, इसलिए उन्होंने इसे रोकने की कोशिश नहीं की। लेकिन उनके दिल में वह हमेशा प्रताप के ही समर्थन में थे और चित्तौड़ के असली राजसिंहासन के लिए प्रताप को ही राजा मानते थे।

राजपूत लोग मुसलमानों के समान नहीं थे कि जब शाहजहां के असली उत्तराधिकारी दारा और शिकोह को मारकर उसका छोटा भाई औरंगजेब दिल्ली के तख्त पर बैठ गया, तब किसी ने कुछ नहीं कहा। जब महाराणा उदयसिंह का अंतिम संस्कार हो रहा था, तो उनके सबसे छोटे बेटे जगमल गद्दी पर बैठे थे। इधर प्रताप, अपने पिता के इस फैसले से काफी दुखी थे और वह मेवाड़ छोड़कर चले जाना चाहते थे। लेकिन सरदारों ने उन्हें रोक लिया और उनके साथ एक योजना बनाई कि कैसे उन्हें ही राजा बनाना चाहिए।

कुछ सरदार प्रताप के साथ राजा के महल पहुंचे। वहां उन्होंने राजा के पद पर बैठे जगमल को समझाया कि यह गद्दी प्रताप सिंह की है। फिर जगमल की बांह पकड़कर उसे नीचे बैठा दिया और प्रताप को तलवार बांध दी। सालाम्ब्रा के अधिकारी ने प्रताप को राजसी वस्त्र पहनाया और सिंहासन पर बिठाया। यह देख, सभी सरदारों ने महाराणा प्रताप की जय-जयकार की। जगमल भी चुपचाप यह सब देखता रहा और कुछ नहीं बोला।

इस तरह महाराणा प्रताप का राजतिलक हुआ और उन्हें मेवाड़ का नया राजा बना दिया गया।

महाराणा प्रताप का राजतिलक

1 thought on “महाराणा प्रताप का राजतिलक: मेवाड़ की गद्दी पर अधिकार की अनसुनी गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक कहानी”

  1. Pingback: महाराणा प्रताप की प्रतिज्ञा: मेवाड़ के गौरव की अनमोल कहानी -

Comments are closed.

Scroll to Top