रिया और जादुई डिब्बा
रिया एक समझदार बच्ची थी। उसे ड्राइंग करना, रंग भरना और नई-नई कहानियाँ लिखना बहुत पसंद था। उसके पास कई रंग-बिरंगी नोटबुक्स, स्केच पेन, क्रेयॉन और पुराने पोस्टर थे जिन पर वह कुछ न कुछ बनाती रहती थी। रिया के कमरे की अलमारियाँ और दराजें इन चीजों से भरी हुई थीं। लेकिन उसे एक आदत थी—जैसे ही उसे नया सामान मिलता, वह पुराने को छोड़ देती।
उसके पापा उसे नई चीजें लाकर देते रहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि रिया का टैलेंट बहुत खास है। लेकिन धीरे-धीरे घर में जगह कम पड़ने लगी और पुराने सामान का ढेर लग गया। रिया कभी भी पुराने स्केच पेन या आधे भरे नोटबुक की तरफ देखती भी नहीं थी।
एक दिन उसकी दादी, जो बहुत समझदार और अनुभवी थीं, गांव से मिलने आईं। उन्होंने रिया का कमरा देखा और मुस्कराईं। फिर उन्होंने अपनी पोटली से एक सुंदर लकड़ी का डिब्बा निकाला। उस पर फूल-पत्तियों की नक्काशी थी और एक चमक थी जो साधारण नहीं लगती थी।

“रिया बेटा, यह तुम्हारे लिए है,” दादी ने कहा।
“यह क्या है, दादी?” रिया ने चौंकते हुए पूछा।
“यह एक जादुई डिब्बा है,” दादी ने रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा। “यह उन बच्चों की मदद करता है जो चीजों की कद्र करना सीखते हैं और हर चीज का सही उपयोग करते हैं।”
रिया की आँखें चमक उठीं। उसने डिब्बा लिया और सोचने लगी कि क्या वाकई यह कोई जादू कर सकता है। अगले दिन उसने अपने पुराने स्केच पेन उठाए और उन्हें डिब्बे में रख दिया। अगले सुबह जब वह डिब्बा खोलकर देखती है, तो हैरान रह जाती है—वे सारे स्केच पेन जैसे नए हो गए थे! उनके रंग फिर से गहरे और चमकदार हो गए थे।
इसके बाद रिया ने अपने पुराने नोटबुक्स, आधे भरे रंगीन पन्ने, और यहां तक कि फटे हुए कागजों को भी फिर से इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। वह अपनी पुरानी चीजों को न सिर्फ सहेजने लगी, बल्कि उन्हें नया जीवन देने की कोशिश भी करने लगी।
धीरे-धीरे लकड़ी का डिब्बा और भी ज्यादा चमकने लगा। उसकी सतह पर सुनहरी रोशनी नज़र आने लगी थी। अब रिया को एहसास हुआ कि यह डिब्बा कुछ खास है—but क्या यह वाकई जादू करता है?
एक दिन उसने दादी से पूछा, “दादी, क्या यह सच में जादुई डिब्बा है?”
दादी मुस्कराईं और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, “असल जादू तो तुम हो, रिया। जब तुमने चीजों की कद्र करना शुरू किया, तब यह डिब्बा जादुई बन गया। जब हम चीजों की अहमियत समझते हैं, तो हर सामान में थोड़ा जादू आ जाता है।”
इसके बाद रिया ने अपने दोस्तों को भी सिखाया कि कैसे पुराने सामान को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है। वह अब फालतू चीजें फेंकने के बजाय उन्हें साफ करके किसी जरूरतमंद को दान कर देती।
रिया और उसका जादुई डिब्बा अब सिर्फ कहानी नहीं थे—वे एक मिसाल बन गए थे, हर उस बच्चे के लिए जो रचनात्मकता के साथ ज़िम्मेदारी निभाना सीख रहा था।
कहानी से सीख : संसाधनों का पूरा उपयोग करो। व्यर्थ मत गवाओ। प्रकृति की चीजों का आदर करो।