बिना हॉर्न की दुनिया : ध्वनि प्रदूषण पर बाल कहानी

यह एक बाल कहानी है जो ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव और समाधान को सरल रूप में प्रस्तुत करती है।

रोहन एक खुशमिजाज और प्यारा लड़का था, जो एक बहुत ही व्यस्त शहर में रहता था। उसका शहर हमेशा जल्दी-जल्दी भागता रहता था, और वहाँ की गलियाँ हर समय लोगों, गाड़ियों, और आवाज़ों से भरी रहती थीं। रोहन हर सुबह स्कूल जाने के लिए निकलता, तो वह गाड़ियों के तेज हॉर्न सुनता जो उसके कानों में कभी-कभी दर्द भी कर देता था। सड़क पर आए दिन गाड़ियों की आवाज़ इतनी तेज होती कि वह न सिर्फ उसे परेशान करती, बल्कि आसपास के पक्षियों और जानवरों को भी डरा देती। पक्षी उड़ कर दूर चले जाते, और कभी-कभी छोटे बच्चे भी हॉर्न की आवाज़ सुन कर डर जाते।

रोहन ने कई बार सोचा कि अगर यह शोर थोड़ा कम हो जाए तो कितना अच्छा होगा, लेकिन वह खुद क्या कर सकता था? वह तो सिर्फ एक छोटा लड़का था। एक दिन स्कूल में उसकी टीचर ने कक्षा में ध्वनि प्रदूषण के बारे में पढ़ाया। टीचर ने बताया कि लगातार तेज आवाज़ से न केवल इंसानों के कानों को नुकसान होता है, बल्कि यह प्रकृति को भी प्रभावित करता है। पक्षियों की आवाज़ें दब जाती हैं, जानवर भयभीत हो जाते हैं, और लोगों का मन और शरीर दोनों अस्वस्थ हो जाते हैं। टीचर ने समझाया कि हमें ध्वनि प्रदूषण को कम करना चाहिए ताकि हमारा पर्यावरण और हम दोनों स्वस्थ रह सकें।

रोहन की सोच में यह बात गहराई से उतर गई। वह अपने दिल में सोचने लगा, “क्या सच में हमारी गली शांत हो सकती है? क्या लोग बिना वजह हॉर्न बजाना बंद कर सकते हैं?” उसने तय किया कि वह कुछ तो करेगा, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो।

शाम को घर वापस आने पर, रोहन ने रंग-बिरंगे कागज निकाले और कुछ पोस्टर बनाने लगा। उसने अपने रंगीन मार्कर से बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा:

  • “बिना वजह हॉर्न न बजाएं”
  • “शांति है सबसे बड़ी शान!”
  • “ध्वनि प्रदूषण बंद करो, जीवन सुखी बनाओ”
  • “शांति से रहें, प्रकृति से प्रेम करें”
ध्वनि प्रदूषण पर बाल कहानी के लिए एक चित्र जिसमें रोहन नाम का बच्चा पोस्टर लेकर खड़ा है और गली को शांत बनाने की कोशिश कर रहा है।

 

रोहन ने अपने माता-पिता से भी मदद ली और वे सभी मिलकर गली के पेड़ों, दीवारों और लाइट पोल्स पर ये पोस्टर चिपकाने लगे। रोहन ने अगली सुबह एक बड़ा बोर्ड भी बनाया जिसमें लिखा था: “कृपया बिना ज़रूरत हॉर्न न बजाएं।” उसने उस बोर्ड को अपने हाथ में पकड़ कर गली में खड़ा हो गया।

शुरुआत में तो कुछ लोग उस पर थोड़ा हँसे भी, कुछ ने कहा, “यह तो बड़ा छोटा लड़का है, क्या फर्क पड़ेगा?” लेकिन कुछ लोग उसके प्रयास को देखकर मुस्कुराए और हॉर्न बजाना कम कर दिया। धीरे-धीरे, गली के लोग इस संदेश को समझने लगे। वे सोचने लगे कि बिना ज़रूरत हॉर्न बजाने से उन्हें क्या फायदा हो सकता है।

कुछ दिनों में ही फर्क महसूस होने लगा। गली की आवाज़ें कम हो गईं, बच्चे आराम से खेल पाने लगे, जो पहले तेज हॉर्न की आवाज़ से डरते थे। पक्षी फिर से पेड़ों पर लौट आए और अपने मधुर गीत गाने लगे। छोटे जानवर भी गली में फिर से घूमने लगे। दादी-दादा, जो रोज़ शाम को टहलने आते थे, अब वे गली की शांति में और भी ज्यादा आनंद लेने लगे।

रोहन के चेहरे पर मुस्कान थी। वह जानता था कि उसकी छोटी सी कोशिश ने बड़ा बदलाव ला दिया था। उसने महसूस किया कि अगर हर कोई थोड़ा-थोड़ा प्रयास करे तो दुनिया और भी बेहतर बन सकती है। उसकी गली अब एक शांतिपूर्ण और सुंदर जगह बन गई थी, जहाँ न केवल लोग खुश थे बल्कि प्रकृति भी खिल उठी थी।

इस अनुभव ने रोहन को बहुत कुछ सिखाया – कि बदलाव के लिए बड़े काम करने की जरूरत नहीं, बस दिल से शुरुआत करनी चाहिए। उसने सोचा, “अगर मेरी गली शांति पा सकती है, तो मेरी पूरी दुनिया भी शांति पा सकती है।”

रोहन अब स्कूल में भी अपनी टीचर की तरह दूसरों को ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने लगा। उसने अपने दोस्तों को भी कहा कि वे अपने घरों, स्कूलों और गली में शांति बनाए रखने की कोशिश करें।

इस तरह, रोहन की छोटी सी पहल ने न केवल उसकी गली को शांति दी, बल्कि पूरे शहर के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि शांति ही सच्ची ताकत है। और इसी शांति के साथ, रोहन हर दिन खुशी-खुशी स्कूल जाता और अपने आस-पास की दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने का सपना देखता।

कहानी से सीख : इस बाल कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि ध्वनि प्रदूषण हमारे जीवन और प्रकृति पर कैसा प्रभाव डालता है, और कैसे छोटे बच्चे भी इसे रोकने में मदद कर सकते हैं।

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