भारत में मुगल शासकों की नीति: अकबर और औरंगजेब की तुलना

भारत में मुगल शासकों की नीति ने भारतीय इतिहास को गहराई से प्रभावित किया है। विशेषकर अकबर और औरंगजेब जैसे सम्राटों की अलग-अलग नीतियों ने समाज, धर्म और राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाले।

अकबर की नीति – कूटनीति और धार्मिक सहिष्णुता

अकबर ने भारत में मुगल शासकों की नीति को एक नई दिशा दी। उन्होंने हिंदुओं के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए, गोहत्या पर रोक लगाई, और हिंदू त्योहारों में भाग लिया। जयपुर के राजा मानसिंह जैसे कई राजपूत राजा अकबर के साथ जुड़ गए और उनके दरबार में उच्च पदों पर आसीन हुए।

अकबर ने यह समझ लिया था कि यदि सीधे युद्ध किया जाए तो राजपूतों को हराना मुश्किल होगा। इसलिए उन्होंने “दोस्त बनाकर जीतो” की नीति अपनाई। उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया, गंगा जल पीया और पारंपरिक वस्त्र धारण किए, जिससे उन्हें हिंदू जनमानस में स्वीकृति मिली। यह नीति राजपूतों की एकता को कमजोर करने और मुगल साम्राज्य को मज़बूत करने का रणनीतिक हिस्सा थी।

भारत में मुगल शासकों की नीति

औरंगजेब की नीति – कट्टरता और धार्मिक दमन

इसके विपरीत, औरंगजेब ने भारत में मुगल शासकों की नीति को एक कट्टर इस्लामी दृष्टिकोण में ढाल दिया। उन्होंने हिंदुओं के मंदिरों को नष्ट किया, जबरन धर्म परिवर्तन कराए और धार्मिक कर (जज़िया) को पुनः लागू किया। उनके शासनकाल में हिंदुओं पर कठोर नियम थोपे गए, जिससे उनमें विद्रोह की भावना पनपी।

औरंगजेब की नीति से हिंदू राजा एकजुट हो गए और मुगलों के प्रति विद्रोह की भावना बढ़ी। उसका अत्यधिक धार्मिक कट्टरता वाला रवैया अंततः उसके शासन की कमजोरी बन गया।

भारत में मुगल शासकों की नीति को समझने के लिए अकबर और औरंगजेब की तुलना अत्यंत उपयोगी है। एक ओर अकबर की उदारता और राजनीतिक चतुराई थी, वहीं दूसरी ओर औरंगजेब की कठोरता और धार्मिक पक्षपात। इन दोनों नीतियों ने भारतीय उपमहाद्वीप की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाला।

Scroll to Top