जादुई आम का पेड़ जीवन मूल्य: बाँटने से खुशी बढ़ती है। एक छोटे-से गाँव में बन्नी नाम का एक नन्हा खरगोश रहता था। उसे मीठे फल बहुत पसंद थे।एक दिन घूमते-घूमते बन्नी की नजर एक आम के पेड़ पर पड़ी। पेड़ पर बड़े-बड़े पीले आम लटक रहे थे।बन्नी की आँखें चमक उठीं।“वाह! इतने सारे आम!” उसने खुशी से कहा।उसने एक आम तोड़ा और खाने ही वाला था कि अचानक पेड़ से आवाज आई,“बन्नी, अकेले मत खाना। अपने दोस्तों को भी बुलाओ।”बन्नी घबरा गया। उसने इधर-उधर देखा।“कौन बोल रहा है?”पेड़ हँसकर बोला,“मैं बोल रहा हूँ!” बन्नी को पहले तो थोड़ा अजीब लगा, फिर उसने सोचा, अकेले आम खाने से अच्छा है कि दोस्तों के साथ खाया जाए।वह तुरंत अपने दोस्तों को बुलाने चला गया।सबसे पहले मिमी बंदर आई। उसके पीछे टो-टो कछुआ और डोडो हिरन भी आ गए।मिमी ने आम देखकर कहा,“अरे वाह! आज तो मजा आ गया!”बन्नी ने आम सबमें बाँट दिए। सबने मिलकर मीठे-मीठे आम खाए और खूब बातें कीं।पेड़ भी जैसे उनकी खुशी देखकर खुश हो गया।अगली सुबह बन्नी फिर पेड़ के पास पहुँचा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं। पेड़ पर पहले से भी ज्यादा आम लगे थे!बन्नी खुशी से बोला,“अरे! इतने सारे आम कहाँ से आ गए?”पेड़ ने धीरे से कहा,“जब खुशी बाँटी जाती है, तो वह और बढ़ जाती है।”उस दिन से बन्नी और उसके दोस्त चीजें मिल-बाँटकर खाने लगे। कभी आम बाँटते, कभी खेलते और कभी बैठकर अपनी मजेदार कहानियाँ सुनाते।अब उस आम के पेड़ के नीचे हर दिन हँसी सुनाई देती थी। कहानी से सीख खुशी अकेले रखने से नहीं, दूसरों के साथ बाँटने से बढ़ती है।