शिकायत छोड़ने वाला मोर
जीवन मूल्य: जो हमारे पास है, उसकी कद्र करनी चाहिए।
एक घने और सुंदर जंगल में पीहू नाम का एक मोर रहता था। उसके पंख बहुत रंग-बिरंगे थे। जब वह अपने पंख फैलाकर नाचता, तो पूरा जंगल जैसे खिल उठता। सभी जानवर उसकी सुंदरता की तारीफ करते थे।
लेकिन पीहू फिर भी खुश नहीं रहता था।
वह अक्सर सोचता,
“काश! मैं कोयल की तरह मीठा गा पाता। सब उसकी आवाज की तारीफ करते हैं।”
एक दिन बूढ़े हाथी गजराज ने पीहू को उदास देखा।
उन्होंने प्यार से कहा,
“पीहू, हर किसी में कोई न कोई खास बात होती है। तुम्हारे पास भी एक सुंदर तोहफा है। उसे पहचानो और खुश रहो।”
पीहू ने गजराज की बात सुनी, लेकिन अपनी आदत नहीं बदल पाया। वह दूसरे पक्षियों से अपनी तुलना करता रहता। धीरे-धीरे उसने नाचना भी छोड़ दिया।
फिर एक दिन जंगल में तेज बारिश शुरू हो गई। हवा इतनी तेज चली कि कई पेड़ गिर गए। नदी का पानी भी बढ़ गया। छोटे-छोटे पक्षी डरकर इधर-उधर छिपने लगे।
तभी पीहू की नजर झाड़ी के नीचे बैठे कुछ नन्हे चिड़िया के बच्चों पर पड़ी। वे ठंड से काँप रहे थे।
पीहू तुरंत उनके पास गया और अपने बड़े-बड़े पंख फैलाकर उन्हें ढक लिया।
कुछ देर बाद तूफान शांत हो गया।
चिड़िया के बच्चे खुशी से बोले,
“पीहू, तुमने हमें बचा लिया! तुम बहुत अच्छे और बहादुर हो।”
आस-पास के जानवर भी पीहू की तारीफ करने लगे।
पीहू के चेहरे पर बड़ी-सी मुस्कान आ गई। उसे पहली बार समझ आया कि दूसरों जैसा बनने की जरूरत नहीं है।
उस दिन के बाद पीहू ने शिकायत करना छोड़ दिया। वह फिर से खुशी-खुशी नाचने लगा।
अब वह किसी की तारीफ पाने के लिए नहीं, बल्कि अपने मन की खुशी के लिए नाचता था।
कहानी से सीख
हमें हमेशा दूसरों से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए। हमारे अंदर भी कुछ खास जरूर होता है। जो हमारे पास है, उसकी कद्र करने से ही सच्ची खुशी मिलती है।
