जब सब कुछ उड़ने लगा

सीख: हमें उन चीज़ों की भी कद्र करनी चाहिए जो दिखाई नहीं देतीं, जैसे गुरुत्वाकर्षण।

रिया की आँख खुली तो उसे सबसे पहले कुछ अजीब-सा दिखाई दिया।

उसकी रजाई बिस्तर पर नहीं थी।

वह कमरे की छत के पास हवा में तैर रही थी!

रिया ने आँखें मलकर दोबारा देखा।

“ये क्या हो रहा है?”

उसने जैसे ही अपना तकिया उठाने की कोशिश की, तकिया भी उसके हाथ से छूटकर ऊपर चला गया। कमरे में रखी किताबें, खिलौने और उसका स्कूल बैग—सब हवा में तैर रहे थे।

तभी रिया बिस्तर से उठी।

लेकिन उसके पैर जमीन तक पहुँचे ही नहीं!

“अरे!”

रिया धीरे-धीरे ऊपर उठने लगी।

“मम्मी!”

कुछ ही सेकंड में वह कमरे की छत के पास पहुँच गई।

मम्मी दौड़कर कमरे में आईं, लेकिन उन्हें भी समझ नहीं आया कि रिया को नीचे कैसे लाएँ। तभी खिड़की से बाहर देखा तो नज़ारा और भी अजीब था।

पेड़ों के पत्ते हवा में तैर रहे थे। साइकिलें जमीन से ऊपर थीं और सड़क पर पानी की बूंदें छोटी-छोटी गेंदों की तरह हवा में घूम रही थीं।

एक पेड़ की डाल पर बैठी चिड़िया भी नीचे उतरने की बजाय हवा में इधर-उधर तैर रही थी।

रिया और अर्जुन गुरुत्वाकर्षण के बिना हवा में उड़ते हुए

रिया को तभी अपने दोस्त अर्जुन की आवाज सुनाई दी।

“रिया! बाहर आओ!”

“लेकिन मैं नीचे कैसे आऊँ?” रिया ने चिल्लाकर पूछा।

अर्जुन हँसते हुए बोला,
“आज गुरुत्वाकर्षण ही गायब हो गया है!”

“गुरुत्वाकर्षण?”

“हाँ! वही ताकत जो हमें जमीन पर रखती है।”

रिया ने खिड़की से बाहर देखा और फिर एक बड़ा-सा गुब्बारा पकड़ लिया।

“तो आज हम भी उड़ेंगे!”

दोनों हँसते हुए हवा में तैरने लगे।

शुरुआत में तो सबको बहुत मज़ा आया।

बच्चे हवा में तैर रहे थे। कुछ लोग छतों के ऊपर से गुजर रहे थे। एक कुत्ता हवा में गोल-गोल घूम रहा था और उसे देखकर बच्चे खिलखिला रहे थे।

अम्मा ने जैसे ही चाय का कप उठाया, कप उनके हाथ से छूटकर हवा में तैरने लगा।

“अरे मेरी चाय!” अम्मा परेशान होकर बोलीं।

लेकिन कुछ ही देर में सबको समझ आने लगा कि गुरुत्वाकर्षण के बिना रहना उतना मज़ेदार नहीं था।

मेज पर रखा खाना हवा में उड़ जाता।

गिलास में पानी भरना मुश्किल हो गया।

टूथब्रश हाथ से छूटते ही ऊपर चला जाता।

और जब रिया की माँ ने उसे एक कुर्सी से पकड़कर बैठाने की कोशिश की, तो कुर्सी भी धीरे-धीरे ऊपर उठने लगी।

“अब तो सच में कुछ करना पड़ेगा,” रिया ने कहा।

अर्जुन ने सोचा और बोला,

“स्कूल की साइंस लैब! शायद वहाँ कोई सुराग मिले।”

दोनों किसी तरह हवा में तैरते हुए स्कूल पहुँचे। वहाँ की साइंस लैब का दरवाजा आधा खुला था।

अंदर हर चीज हवा में तैर रही थी—ग्लोब, मॉडल, किताबें और यहाँ तक कि मेज पर रखा छोटा रोबोट भी।

तभी रिया की नजर दीवार पर लगे एक बड़े पैनल पर पड़ी।

उस पर लिखा था—

GRAVITY: ON / OFF

और उसके नीचे एक लाल बत्ती जल रही थी।

अर्जुन की आँखें बड़ी हो गईं।

“रिया! लगता है किसी ने गलती से गुरुत्वाकर्षण बंद कर दिया!”

“तो इसे वापस चालू करो!”

रिया ने आगे बढ़कर बड़े से बटन को दबा दिया।

बीप!

कुछ पल तक कुछ नहीं हुआ।

फिर अचानक कमरे में रखी चीजें धीरे-धीरे नीचे आने लगीं।

ग्लोब अपनी जगह लौट आया।

किताबें जमीन पर आ गिरीं।

रोबोट मेज पर टिक गया।

और बाहर हवा में तैरती बिल्ली भी धीरे से जमीन पर उतर आई।

कुछ ही देर में पूरा गाँव पहले जैसा हो गया।

रिया ने जमीन पर दोनों पैर मजबूती से टिकाए और राहत की साँस ली।

फिर उसने आसमान की ओर देखा और हँसते हुए कहा,

“उड़ना मजेदार था… लेकिन जमीन पर रहना उससे भी अच्छा है!”

अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा,

“अब समझ आया कि जो चीज हमें दिखाई भी नहीं देती, वह हमारे लिए कितनी जरूरी हो सकती है।”

रिया ने सिर हिलाया।

उस दिन से जब भी वह जमीन पर चलती, उसे एक छोटी-सी अदृश्य ताकत याद आती—गुरुत्वाकर्षण।

कहानी से सीख

हमारे आसपास कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें हम देख नहीं सकते, फिर भी वे हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी होती हैं। गुरुत्वाकर्षण उनमें से एक है। इसलिए हमें प्रकृति की उन शक्तियों की भी कद्र करनी चाहिए, जिनके बिना हमारा रोज़मर्रा का जीवन संभव नहीं होता।

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