लड़का और गाय
जीवन मूल्य: दया और सच्ची दोस्ती
हरे-भरे पेड़ों और छोटे-छोटे खेतों से घिरे एक गाँव में रोहन नाम का एक चंचल और हंसमुख लड़का रहता था। उसे गाँव के बाहर घूमना, पेड़ों के नीचे खेलना और नई-नई जगहों को देखना बहुत पसंद था।
रोहन की सबसे अच्छी दोस्त थी—लक्ष्मी।
लक्ष्मी एक शांत और प्यारी गाय थी। उसका शरीर दूध जैसा सफेद था और उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में हमेशा अपनापन झलकता था। रोहन जब भी उसके पास जाता, लक्ष्मी अपनी पूँछ हिलाकर उसका स्वागत करती।
दोनों की दोस्ती बड़ी अनोखी थी। रोहन उससे बातें करता और लक्ष्मी चुपचाप उसकी बातें सुनती रहती।
एक दिन दोपहर के समय रोहन और लक्ष्मी गाँव के पास खेल रहे थे। तभी रोहन की नजर झाड़ियों के पीछे जाती एक पतली-सी पगडंडी पर पड़ी।
“अरे! ये रास्ता यहाँ से कहाँ जाता होगा?” रोहन ने उत्सुकता से कहा।
उसने चारों तरफ देखा। रास्ता पेड़ों के बीच अंदर की ओर जा रहा था।
“चलो लक्ष्मी, आज देखते हैं कि आगे क्या है!”
लक्ष्मी ने जैसे उसकी बात समझ ली। वह धीरे-धीरे रोहन के पीछे चल पड़ी।
दोनों थोड़ी दूर तक उस अनजान रास्ते पर चलते रहे। चारों तरफ ऊँचे पेड़ थे। हवा चलती तो पत्ते सरसराने लगते। कहीं दूर से पक्षियों के चहचहाने की आवाज आती।
कुछ देर बाद पेड़ों के बीच से पानी की चमक दिखाई दी।
रोहन खुशी से उछल पड़ा।
“वाह! यहाँ तो नदी है!”
वह पास गया तो देखा कि वह एक छोटी और साफ-सुथरी धारा थी। पानी इतना साफ था कि नीचे पड़े छोटे-छोटे पत्थर भी दिखाई दे रहे थे। रंग-बिरंगी मछलियाँ पानी में इधर-उधर तैर रही थीं।
रोहन किनारे पर बैठ गया।
“लक्ष्मी, देखो! कितनी सुंदर मछलियाँ हैं!”
लक्ष्मी ने पानी पिया और फिर पास खड़ी होकर मछलियों को देखने लगी।
तभी अचानक झाड़ियों की ओर से बहुत धीमी आवाज आई—
“चीं… चीं…”
रोहन ने ध्यान से सुना।
“लक्ष्मी, तुम्हें भी आवाज सुनाई दी?”
आवाज फिर आई।
रोहन तुरंत उठ खड़ा हुआ और आवाज की दिशा में चल पड़ा। थोड़ी दूर जाकर उसने देखा कि एक छोटा-सा पक्षी काँटेदार झाड़ी में फँसा हुआ था। वह अपने पंख छुड़ाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जितना कोशिश करता, उतना ही काँटों में उलझ जाता।
“डरो मत, मैं तुम्हें निकालता हूँ,” रोहन ने धीरे से कहा।
उसने सावधानी से एक-एक करके काँटों को हटाया। कुछ देर की मेहनत के बाद पक्षी आजाद हो गया।
पक्षी जमीन पर बैठकर कुछ पल तक अपने पंख फड़फड़ाता रहा।
लक्ष्मी भी उसके पास आ गई। उसने अपनी नरम नाक से पक्षी को हल्के से छुआ, जैसे कह रही हो—“अब तुम ठीक हो।”
रोहन मुस्कुराया।
“हाँ लक्ष्मी, अब ये बिल्कुल ठीक है।”
पक्षी ने एक बार रोहन और लक्ष्मी की ओर देखा और फिर खुशी से चहचहाता हुआ उड़ गया।
रोहन काफी देर तक उसे आसमान में उड़ते देखता रहा।
“कितना अच्छा लग रहा है ना, लक्ष्मी? हमने इसकी मदद की।”
लक्ष्मी ने धीरे से आवाज की, जैसे वह भी रोहन की बात से सहमत हो।
शाम होने लगी थी। सूरज धीरे-धीरे पेड़ों के पीछे छिपने लगा था। रोहन समझ गया कि अब घर लौटने का समय हो गया है।
वह उसी पगडंडी से वापस चल पड़ा और लक्ष्मी उसके साथ-साथ चलती रही।
आज की छोटी-सी यात्रा ने रोहन को बहुत खुश कर दिया था। उसे लगा कि जंगल में घूमने से भी ज्यादा अच्छा किसी जरूरतमंद की मदद करना था।
घर लौटते समय उसने लक्ष्मी के गले पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा,
“तुम सिर्फ मेरी दोस्त नहीं हो, लक्ष्मी। तुम मेरी सबसे अच्छी साथी हो।”
लक्ष्मी ने अपनी पूँछ हिलाई और दोनों धीरे-धीरे गाँव की ओर चल पड़े।
कहानी से सीख
सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने में मिलती है। हमें हर जीव के प्रति दया और करुणा रखनी चाहिए। सच्चा दोस्त वही है जो मुश्किल समय में साथ खड़ा रहे।
