“हर बूँद कीमती है”
जीवन मूल्य: पानी बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
एक छोटे से गाँव में रोहन नाम का एक प्यारा और समझदार लड़का रहता था। उसे बाहर खेलना और अपनी माँ की मदद करना बहुत अच्छा लगता था।
गर्मी के दिन थे। इस बार गाँव में कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। धीरे-धीरे गाँव के कुएँ भी सूखने लगे।
एक दिन रोहन ने देखा कि गाँव की औरतें बहुत दूर से पानी भरकर ला रही थीं। घर में भी कई बार नल खुला रह जाता था और पानी बेकार बहता रहता था।
रोहन ने माँ-पापा से कहा,
“हमें पानी बचाना चाहिए। नहाते समय बाल्टी का इस्तेमाल करें और ब्रश करते समय नल बंद रखें।”
माँ ने कहा,
“बात तो तुम सही कह रहे हो। आज से हम ध्यान रखेंगे।”
अगले दिन रोहन ने स्कूल में अपने दोस्तों को भी पानी बचाने के बारे में बताया। उसके शिक्षक ने भी बच्चों से कहा,
“अगर हम छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो बहुत सारा पानी बच सकता है।”
धीरे-धीरे गाँव के लोगों ने भी पानी बचाना शुरू कर दिया। किसी ने टपकता नल ठीक कराया, तो किसी ने बारिश का पानी जमा करने की व्यवस्था की।
कुछ समय बाद गाँव में फिर पानी की परेशानी कम होने लगी।
एक दिन गाँव के सरपंच ने रोहन को बुलाया और कहा,
“तुमने हमें एक बहुत जरूरी बात याद दिलाई है—हर बूँद कीमती है।”
रोहन मुस्कुराया। उसे खुशी थी कि उसकी छोटी-सी कोशिश से पूरे गाँव को फायदा हुआ।
उस दिन से गाँव के सभी लोग पानी की कदर करने लगे।
कहानी से सीख
पानी बहुत कीमती है। हमें नल खुला नहीं छोड़ना चाहिए और जरूरत के अनुसार ही पानी इस्तेमाल करना चाहिए। छोटी-सी बचत भी बड़ा बदलाव ला सकती है।
